ग्राम पंचायत सरसवाही में सरपंच एवं सचिव पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

शासन की योजनाओं में अनियमितता, फर्जी बिल और मनरेगा श्रमिकों से कराया जा रहा निर्माण कार्य

शहपुरा – ग्राम पंचायत सरसवाही एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच और सचिव पर शासन की विभिन्न योजनाओं में वित्तीय अनियमितता और फर्जी बिलों से भुगतान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने इस संबंध में जनपद पंचायत शहपुरा और कलेक्टर डिंडौरी को शिकायत सौंपी है।

💰 फर्जी बिलों से 15वें वित्त की राशि का दुरुपयोग

जानकारी के अनुसार, ग्राम पहरुआ में 15वें वित्त आयोग की राशि से सीसी रोड निर्माण कार्य कराया गया जिसकी लागत लगभग ₹9 लाख 43 हजार बताई गई। ग्रामीणों का कहना है कि इस राशि का भुगतान “अजीत ट्रेडर्स” नामक फर्म के बिलों के आधार पर किया गया, जबकि अजीत नाम का व्यक्ति कोई दुकान संचालित नहीं करता और न ही उसके पास निर्माण सामग्री आपूर्ति के साधन हैं।
आरोप है कि यह व्यक्ति पंचायत में मेट के पद पर कार्यरत है और पहले से ही खेत तालाब, प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं से लाभान्वित हो चुका है। बावजूद इसके, सरपंच और सचिव के संरक्षण में फर्जी बिल तैयार कर शासन की राशि का गबन किया गया। बताया गया कि भुगतान में सरपंच के पुत्र और सचिव के परिजनों के नाम का भी उपयोग किया गया है।

🏠 प्रधानमंत्री आवास योजना में भी गड़बड़ी

ग्रामीणों ने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में भी भारी अनियमितताएं हुई हैं। बताया गया कि पैसे लेकर कुछ अपात्र हितग्राहियों को डबल मंजिला मकान दिलाए गए, जबकि कई पात्र परिवार आज भी आवास से वंचित हैं।

👷‍♂️ मनरेगा श्रमिकों से कराया गया निर्माण कार्य

पंचायत में चल रहे निर्माण कार्यों में लेबर भुगतान के नाम पर राशि जोड़ी गई, लेकिन वास्तव में मनरेगा श्रमिकों से ही काम कराया गया। यह शासन के नियमों का उल्लंघन और आदेशों की अवहेलना दोनों है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक जनपद पंचायत स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो अन्य योजनाओं में भी इस तरह की गड़बड़ियां जारी रहेंगी।

📑 जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सरपंच और सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, फर्जी बिलों की जांच और गबन की गई राशि की रिकवरी की मांग की है।

❓ अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

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