भोपाल – प्रदेश की शिवराज सरकार के बाद अब वर्तमान राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए यह निर्णय लिया है कि राज्य के सभी नगरीय निकायों, नगर निगमों और मंडलों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी।
सरकार का यह कदम वित्तीय अनुशासन और तंत्र में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से बताया जा रहा है।
💬 कर्मचारियों में हड़कंप, उठे सवाल — “अब घर कैसे चलेगा?”
सरकार के इस निर्णय से प्रदेशभर में कार्यरत हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष फैल गया है। कई निकायों में कर्मचारी संगठन इस फैसले के विरोध की तैयारी में जुट गए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार अब उन्हें एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा रही है।
सरकार का तर्क — “अनियमित व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा”
वहीं, शासन स्तर से मिली जानकारी के अनुसार दैनिक वेतनभोगियों की नियुक्ति में वर्षों से अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आ रही थीं।
सरकार का कहना है कि जिन पदों की आवश्यकता होगी, वहां संविदा या नियमित प्रक्रिया से पुनः भर्ती की जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय — “निर्णय जल्दबाजी में लिया गया”

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस निर्णय से पहले एक ठोस पुनर्वास नीति बनानी चाहिए थी, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को वैकल्पिक रोजगार मिल सके।
दैनिक वेतनभोगियों की सेवा समाप्त करने के फैसले से जहां शासन को राहत मिलेगी, वहीं आम परिवारों की रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
