
शहपुरा – जल संसाधन विभाग, शाहपुरा के प्रांगण में एक सरकारी ट्रक पिछले कई वर्षों से जंग खाकर कबाड़ बनने की कगार पर खड़ा है, लेकिन विभागीय जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं। लाखों रुपए का यह सरकारी संसाधन लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है, फिर भी अधिकारी बन बैठे हैं अनजान ग्रामीणों और विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक, यह ट्रक लंबे समय से यहीं खड़ा है, जिसकी हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि उसके पुर्जे तक गल चुके हैं। ट्रक पर धूल, जंग और खरपतवार की मोटी परत लापरवाही की कहानी खुद बयान कर रही है। जब हरिभूमि समाचार पत्र के संवाददाता ने इस मामले में जल संसाधन विभाग के एसडीओ से बात की, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा “मैं हाल ही में विभाग में ट्रांसफर होकर आया हूं, इस संबंध में उच्च अधिकारियों से चर्चा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” लेकिन सवाल यह है कि इतने वर्षों तक यह ट्रक आखिर विभाग के आंगन में सड़ता कैसे रहा? न किसी ने मरम्मत कराई, न नीलामी की प्रक्रिया शुरू हुई — क्या यह सरकारी संपत्ति की खुलेआम बर्बादी नहीं? स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग की यह लापरवाही सरकारी संसाधनों के संरक्षण पर गंभीर सवाल उठाती है। अगर यही हाल रहा, तो सरकारी संपत्तियाँ इसी तरह कबाड़ बनती रहेंगी और जिम्मेदार अधिकारी “नई पोस्टिंग” का हवाला देकर पल्ला झाड़ते रहेंगे।

