
डिंडौरी – डिंडौरी जिले की जनपद पंचायतों में विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। दरअसल, जनपद पंचायत मेहंदवानी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को अतिरिक्त रूप से डिंडौरी और शाहपुरा जनपद पंचायतों का प्रभार भी सौंपा गया है। एक ही अधिकारी के पास तीन जनपदों की जिम्मेदारी होने से प्रशासनिक कार्य और सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।ग्रामीणों, सरपंचों और सचिवों को अपने पंचायत संबंधी कार्यों के लिए जनपद कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन सीईओ की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।शाहपुरा जनपद पंचायत में तो हालात और भी गंभीर हैं — कई महत्वपूर्ण फाइलें और प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। आरटीआई से संबंधित कार्यवाही, पंचायत योजनाओं की स्वीकृति और निर्माण प्रस्तावों की फाइलें महीनों से “पेंडिंग” बताई जा रही हैं।जनपद पहुंचने वाले लोगों का कहना है कि जब वे किसी काम या शिकायत को लेकर सीईओ से मिलने आते हैं, तो उनके केबिन में ताला लटका हुआ मिलता है। स्थानीय लोगों ने व्यंग्य में कहा कि “अब तक नए जनपद सीईओ शाहपुरा के दर्शन तक नहीं हो सके।”इस पूरे मामले को लेकर जनपद सदस्य संतोष सिंह चंदेल (क्षेत्र क्रमांक 17, डिंडौरी) ने जिला प्रभारी मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी को पत्र लिखकर मांग की है कि डिंडौरी जनपद पंचायत के लिए स्थायी सीईओ की नियुक्ति की जाए, ताकि जनहित के कार्य समय पर हो सकें।चंदेल ने कहा कि “एक ही अधिकारी के पास तीन जनपदों का कार्यभार होना शासन की योजनाओं की गति को रोक रहा है। पंचायत स्तर पर विकास कार्य लगभग ठप्प पड़ चुके हैं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है।”

