वित्त से हुआ निर्माण, भुगतान 5वें वित्त से — कार्यालय व्यय के नाम पर निकाली गई राशि

डिंडोरी– जनपद पंचायत डिंडोरी की ग्राम पंचायत पोड़ी मॉल एक बार फिर चर्चाओं में है। पंचायत में हुए बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य को लेकर वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह कार्य 15वें वित्त आयोग की राशि से किया गया, लेकिन भुगतान 5वें वित्त आयोग के “कार्यालय व्यय” के अंतर्गत कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य की अनुमानित लागत लगभग ₹5 लाख है, जिसमें से ₹2,50,514 की राशि 5वें वित्त से आहरित की गई है। यह प्रक्रिया अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

वित्तीय अनुशासन पर सवाल

वित्त आयोग की निधियों का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप होना आवश्यक है। 15वें वित्त की राशि आमतौर पर विकास कार्यों के लिए होती है, जबकि 5वें वित्त की राशि प्रशासनिक व कार्यालयीन खर्चों के लिए। ऐसे में निर्माण कार्य का भुगतान 5वें वित्त से किया जाना पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

तकनीकी मूल्यांकन हुआ, पर प्रक्रिया संदिग्ध

जानकारी के मुताबिक, बाउंड्री वॉल निर्माण का तकनीकी मूल्यांकन संबंधित उपयंत्री द्वारा किया गया था, जिसके आधार पर भुगतान स्वीकृत किया गया। लेकिन यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि 15वें वित्त से कार्य पूर्ण होने के बाद भुगतान किसी अन्य शीर्ष से क्यों किया गया।

पूर्व में भी विवादों में रही पंचायत

यह पहला मौका नहीं है जब ग्राम पंचायत पोड़ी मॉल का नाम वित्तीय विवादों में आया हो। इससे पहले भी विकास कार्यों में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं, जिनकी जांच शुरू तो हुई, पर निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई। एक बार फिर नया मामला सामने आने से ग्रामीणों में नाराज़गी और चर्चा तेज हो गई है।

ग्रामीणों की मांग — “सत्यापन जांच कराई जाए”

ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका तर्क है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है, तो प्रशासन को इसकी पुष्टि करनी चाहिए ताकि पंचायत की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास कायम रहे।

विशेषज्ञों की राय — निधियों का उपयोग नियम अनुसार हो

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक शीर्ष की राशि को दूसरे उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाता है, तो यह वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन है। ऐसी स्थिति में भविष्य के विकास कार्यों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर असर पड़ता है।

प्रशासन के लिए चुनौती — जवाबदेही और विश्वास बनाए रखना

डिंडोरी जिले की कई पंचायतों में समय-समय पर ऐसे प्रकरण सामने आते रहे हैं। अब यह प्रशासन के लिए चुनौती है कि वह वित्तीय अनुशासन बनाए रखे और जनता के विश्वास को कायम रखे।

इनका कहना है —

दिव्यांशु चौधरी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डिंडोरी

“अभी-अभी तथ्य सामने आए हैं, जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्यवाही की जाएगी।”

अमित नैनोटे, उपयंत्री पंचायत विभाग

“इस निर्माण कार्य का तकनीकी मूल्यांकन मेरे द्वारा किया गया था और एक किस्त जारी हुई है। लेकिन मुझे नहीं पता कि सचिव-सर्पंच ने 15वें वित्त की राशि को 5वें वित्त से कैसे निकाल लिया।”

राकेश ठाकुर, सचिव ग्राम पंचायत पोड़ी मॉल

“पेमेंट नहीं हो रहा था, इसलिए 15वें वित्त की राशि को 5वें वित्त में कन्वर्ट कर भुगतान किया गया।”

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